शोभा किरण

सावन रूठा है

फूल भी रूठे ,उपवन रूठा।
घर आंगन भी रूठा है ।
तुम जो मुझसे रूठ गए हो,
सावन मुझसे रूठा है।
जो पल हमने साथ गुजारे,
याद में उसकी खोई हूं ।
चेहरे पर मुस्कान लिए,
छुप छुप कितना रोई हूँ।
करूं कैसे श्रृंगार प्रिय अब ,
दर्पण मुझसे रूठा है ।
तुम जो मुझसे रूठ गए हो,
सावन मुझसे रूठा है ।
प्रेम की पथरीली राहों पर ,
संग तुम्हारे चलना है ,
शूल हो या कि हो अंगारे ,
उन शोलों में जलना है ।
विरहा की अग्नि में तपकर ,
तन मन मुझसे रूठा है ।
तुम जो मुझसे रूठ गए हो ,
सावन मुझसे रूठा है ।
झर झर बरसे मेघ गगन से,
कोयल कूक के गाए हैं,
मन पर छाए गम के बादल ,
कैसी टीस उठाए हैं ।
कुम्भलाया फूलों सा चेहरा,
यौवन मुझसे रूठा है,
तुम जो मुझसे रूठ गए हो ,
सावन मुझसे रूठा है ।
सांसों की रफ्तार है धीमी ,
धीमी धड़कन कब तक है ।
मत रो बादल मेरे दुख पर ,
यह तो मेरी किस्मत है ।
अब मेरा अधिकार है किसपर,
जीवन मुझसे रूठा है ।
तुम जो मुझसे रूठ गए हो,
सावन मुझसे रूठा है।

शोभा किरण
जमशेदपुर/झारखंड

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