प्रकृति और हम

प्रकृति और हम
(पर्यावरण दिवस पर)
धरती ख़ुश हैं
आपके पैरों के थाप को महसूस करके
बिल्कुल माँ की तरह
अपनें छाती पर शिशु के पैरों की मार खा करके

सूरज ख़ुश हैं
आपके चेहरें का प्रथम दर्शन करके
रात के अंधेरों से निकलनें के बाद
जैसे बरसों बाद श्री कृष्ण खुश हुए
राधा को देख कर के
कुरुक्षेत्र में सूर्यग्रहण के आत्म आनन्दोत्सव में

हवा बेचैन हैं
आपके बिखरें बालों को सुलझाने के लिए
जो बिखरें हैं रात के गहन अंधेरें में
इसलिए ,तो खिड़कियों को खोलकर
आपके बालों को छू गए जबरदस्ती
शायद आपसे पूछें बिना
आप ख़ुश हैं हवा की
इस अठखेलियाँ से
इसलिए तो आपने लहरा दिए अपनें बाल
खिड़की खोलकर हवा में
अब आप भी ख़ुश हैं और हवा भी
इस छुअन से

अम्बर ख़ुश हैं
आपके मुस्करातें चेहरें को देखने के लिए
उसने हटा दिया हैं अपनी आँखों के सब अड़चन को
जो छा गए थे रात के गहन अंधकार में
छोटे छोटे बादलों के रूप में उसकी आँखों पर

प्रकृति ख़ुश हैं
आपको मुस्करातें हुए देखकर
बेचैन हैं आपकों अपनी आग़ोश में भरने के लिए
आप भी उससे लिपट जाईये
सब कुछ भूलकर
भौतिकता को त्याग कर एक पल को
क्योंकि भौतिकता हैं क्षणभंगुर
और प्रकृति हैं शाश्वत नश्वर
आपको आनन्दित आह्लादित करने के लिए ।।
©बिमल तिवारी “आत्मबोध”
  यायावर लेखक अल्हड़ कवि
  देवरिया उत्तर प्रदेश

mediapanchayat

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Next Post

एसएसबी की 66वीं वाहिनी के जवानों ने किया पौधा-रोपण

Fri Jun 5 , 2020
मीडिया पंचायत न्यूज़ नेटवर्क/ सोनौली: विश्व पर्यावरण दिवस पर शुक्रवार को एसएसबी के 66वीं वाहिनी के जवानों ने पौधा रोपण किया। साथ ही ग्रामीणों को पर्यावरण संतुलन में पेड़-पौधों की महत्ता के बारे में बताया।एसएसबी कमान्डेंट ए.एस. राठौड़ ने कहा किहर व्यक्ति कम से कम एक एक पौधा लगाकर अपने […]

Breaking News