पद्मभूषण श्री गोपाल दास नीरज जी की द्वितीय पुण्यतिथि की पूर्व संध्या के अवसर पर एक भव्य भावांजलि समारोह आयोजित-प्रेरणा दर्पण

18 जुलाई 2020 को
प्रेरणा दर्पण साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच नयी दिल्ली और महाकवि नीरज फाउन्डेशन आगरा के संयुक्त तत्वावधान में

18 जुलाई 2020 को
प्रेरणा दर्पण साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच नयी दिल्ली और महाकवि नीरज फाउन्डेशन आगरा के संयुक्त तत्वावधान में पद्मभूषण श्री गोपाल दास नीरज जी की द्वितीय पुण्यतिथि की पूर्व संध्या के अवसर पर एक भव्य भावांजलि समारोह आयोजित किया।
सबसे पहले अन्तर्राष्ट्रीय कवयित्री एवं प्रसिद्ध मंच संचालिका और प्रेरणा दर्पण साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच की अध्यक्ष डॉ कीर्ति काले ने नीरज जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपने विचार प्रकट करते हुए उन्हें इस सदी का महानायक बताया और उपस्थित सभी का स्वागत किया।तदुपरांत संस्था के उपाध्यक्ष श्री ओमप्रकाश कल्याणे ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।
अनन्या द्वारा प्रस्तुत की गई सरस्वती वन्दना से प्रारम्भ हुए इस भव्य समारोह में जाने माने कवियों एवं कवयित्रियों ने नीरज जी के गीतों एवं ग़ज़लों को उन्हीं के अन्दाज में प्रस्तुत कर समां बांध दिया।


डॉ कीर्ति काले –
ऐसी क्या बात है चलता हूँ अभी चलता हूँ। गीत एक और जरा झूम के गा लूं तो चलूं
नीरज जी के सुपुत्र शशांक प्रभाकर –
आदमी को आदमी बनाने के लिए
जिन्दगी में प्यार की कहानी चाहिए
डॉ विष्णु सक्सेना –
छुप छुप अश्रु बहाने वालों
मोती व्यर्थ लुटाने वालों
कुछ सपनों के मर जाने से
जीवन नहीं मरा करता है
रामेन्द्र त्रिपाठी –
कारवां गुज़र गया गया गुबार देखते रहे
डॉ रुचि चतुर्वेदी –
मैं पीड़ा का राजकुंवर हूँ तुम शहजादी रूप नगर की
सोम ठाकुर – साठ साल पुरानी कविता सुनाई
सोनरूपा विशाल –
अबकी सावन में शरारत ये मेरे साथ हुई
लक्ष्मी शंकर वाजपेई
इतने बदनाम हुए हम तो इस ज़माने में, तुमको लग जाएंगी सदियाँ हमें भुलाने में
कैलाश मण्डेला –
खारा कहीं गंगा का किनारा हो न जाए
गोविन्द मून्दड़ा-
चल औघट घाट पे यार ज़रा
चिराग जैन-
अगर तीसरा युद्ध हुआ तो नई उमर की नई सुबह का क्या होगा
सपना सोनी –
लोकेश महाकाली-
छुपे रुस्तम हैं कयामत की नजर रखते हैं
योगेन्द्र शर्मा –
ये प्यासों की प्रेम सभा है यहाँ सम्हलकर आना जी
काव्यांजलि ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
भावांजलि के अन्तर्गत हिन्दी के लब्ध प्रतिष्ठ रचनाकारों ने पद्मभूषण श्री गोपाल दास नीरज जी के साथ बिताए दिनों की स्मृतियों को सांझा करके उनके प्रति भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
पद्मश्री सुरेन्द्र शर्मा ने कहा –
नीरज जी कवि सम्मेलन रूपी मन्दिर के नींव के पत्थर भी हैं और गुम्बद भी हैं।
डॉ हरिओम पंवार ने कहा -हिन्दी कवि सम्मेलनों पर जो आरोप लगाए जाते हैं उन सभी का एक मात्र जवाब नीरज जी हैं।
डॉ कुंअर बेचैन ने कहा –
नीरज जी की कविताओं में तुलसी की भक्ति,कबीर का फक्कड़पन,ओशो का दर्शन और घनानंद का प्रेम समाहित है।
सुरेश नीरव ने जानकारी दी कि नीरज जी कवि होने के साथ-साथ श्रेष्ठ ज्योतिषी भी थे।
उदयप्रताप सिंह ने भिण्ड के कवि सम्मेलन का किस्सा सुनाकर नीरज जी के मिलनसार स्वभाव से अवगत कराया।
डॉ बुद्धिनाथ मिश्र ने कहा कि युवा पीढ़ी में आशावाद का संस्कार देने के लिए पाठ्यक्रमों में नीरज को प्रमुख रूप से पढ़ाया जाना चाहिए।
बालस्वरूप राही, कृष्ण मित्र, बलवीर सिंह करुण, डॉ प्रवीण शुक्ल, डॉ सुरेश अवस्थी, सर्वेश अस्थाना,विश्र्वम्भर मोदी,महेश्र्वर तिवारी,विनीत चौहान, धीरेन्द्र शुक्ल,प्रेमबिहारी मिश्रा, डॉ रमा सिंह,अनूप भार्गव
आदि ने भी अपने महत्त्वपूर्ण विचार रखे।
प्रेरणा दर्पण साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच के महासचिव हरिप्रकाश पाण्डे ने उपस्थित सभी रचनाकारों एवं श्रोताओं के प्रति आभार प्रदर्शन किया।
फिर शुरू हुई नीरज जी द्वारा लिखे सुपरहिट फिल्मी गीतों की आर्केस्ट्रा के साथ प्रस्तुति।
फूलों के रंग से दिल की कलम से हमने लिखी रोज पाती, कारवां गुज़र गया गुबार देखते रहे, शोखियों में घोला जाए फूलों का शबाब,ऐ भाई ज़रा देख के चलो,जीवन की बगिया महकेगी,फलसफा प्यार का तुम क्या जानो,काल का पहिया घूमे रे
भैया जैसे सुपरहिट गीतों से सजी यह शाम अपने प्रिय गीतकार को याद करते हुए बहुत सुहानी हो गई।इस सदी के महानायक को हजारों चाहने वालों ने अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
यह पूरा आयोजन फेसबुक पर लाइव हुआ।जिसका हजारों श्रोताओं ने आनन्द लिया।
न्यूज पेपर के लिए👆

जित किया।
सबसे पहले अन्तर्राष्ट्रीय कवयित्री एवं प्रसिद्ध मंच संचालिका और प्रेरणा दर्पण साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच की अध्यक्ष डॉ कीर्ति काले ने नीरज जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर अपने विचार प्रकट करते हुए उन्हें इस सदी का महानायक बताया और उपस्थित सभी का स्वागत किया।तदुपरांत संस्था के उपाध्यक्ष श्री ओमप्रकाश कल्याणे ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।
अनन्या द्वारा प्रस्तुत की गई सरस्वती वन्दना से प्रारम्भ हुए इस भव्य समारोह में जाने माने कवियों एवं कवयित्रियों ने नीरज जी के गीतों एवं ग़ज़लों को उन्हीं के अन्दाज में प्रस्तुत कर समां बांध दिया।
डॉ कीर्ति काले –
ऐसी क्या बात है चलता हूँ अभी चलता हूँ। गीत एक और जरा झूम के गा लूं तो चलूं
नीरज जी के सुपुत्र शशांक प्रभाकर –
आदमी को आदमी बनाने के लिए
जिन्दगी में प्यार की कहानी चाहिए
डॉ विष्णु सक्सेना –
छुप छुप अश्रु बहाने वालों
मोती व्यर्थ लुटाने वालों
कुछ सपनों के मर जाने से
जीवन नहीं मरा करता है
रामेन्द्र त्रिपाठी –


कारवां गुज़र गया गया गुबार देखते रहे
डॉ रुचि चतुर्वेदी –
मैं पीड़ा का राजकुंवर हूँ तुम शहजादी रूप नगर की
सोम ठाकुर – साठ साल पुरानी कविता सुनाई
सोनरूपा विशाल –
अबकी सावन में शरारत ये मेरे साथ हुई
लक्ष्मी शंकर वाजपेई
इतने बदनाम हुए हम तो इस ज़माने में, तुमको लग जाएंगी सदियाँ हमें भुलाने में
कैलाश मण्डेला –
खारा कहीं गंगा का किनारा हो न जाए
गोविन्द मून्दड़ा-
चल औघट घाट पे यार ज़रा
चिराग जैन-
अगर तीसरा युद्ध हुआ तो नई उमर की नई सुबह का क्या होगा
सपना सोनी –
लोकेश महाकाली-
छुपे रुस्तम हैं कयामत की नजर रखते हैं
योगेन्द्र शर्मा –
ये प्यासों की प्रेम सभा है यहाँ सम्हलकर आना जी
काव्यांजलि ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
भावांजलि के अन्तर्गत हिन्दी के लब्ध प्रतिष्ठ रचनाकारों ने पद्मभूषण श्री गोपाल दास नीरज जी के साथ बिताए दिनों की स्मृतियों को सांझा करके उनके प्रति भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
पद्मश्री सुरेन्द्र शर्मा ने कहा –
नीरज जी कवि सम्मेलन रूपी मन्दिर के नींव के पत्थर भी हैं और गुम्बद भी हैं।
डॉ हरिओम पंवार ने कहा -हिन्दी कवि सम्मेलनों पर जो आरोप लगाए जाते हैं उन सभी का एक मात्र जवाब नीरज जी हैं।
डॉ कुंअर बेचैन ने कहा –
नीरज जी की कविताओं में तुलसी की भक्ति,कबीर का फक्कड़पन,ओशो का दर्शन और घनानंद का प्रेम समाहित है।
सुरेश नीरव ने जानकारी दी कि नीरज जी कवि होने के साथ-साथ श्रेष्ठ ज्योतिषी भी थे।
उदयप्रताप सिंह ने भिण्ड के कवि सम्मेलन का किस्सा सुनाकर नीरज जी के मिलनसार स्वभाव से अवगत कराया।
डॉ बुद्धिनाथ मिश्र ने कहा कि युवा पीढ़ी में आशावाद का संस्कार देने के लिए पाठ्यक्रमों में नीरज को प्रमुख रूप से पढ़ाया जाना चाहिए।
बालस्वरूप राही, कृष्ण मित्र, बलवीर सिंह करुण, डॉ प्रवीण शुक्ल, डॉ सुरेश अवस्थी, सर्वेश अस्थाना,विश्र्वम्भर मोदी,महेश्र्वर तिवारी,विनीत चौहान, धीरेन्द्र शुक्ल,प्रेमबिहारी मिश्रा, डॉ रमा सिंह,अनूप भार्गव
आदि ने भी अपने महत्त्वपूर्ण विचार रखे।


प्रेरणा दर्पण साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच के महासचिव हरिप्रकाश पाण्डे ने उपस्थित सभी रचनाकारों एवं श्रोताओं के प्रति आभार प्रदर्शन किया।
फिर शुरू हुई नीरज जी द्वारा लिखे सुपरहिट फिल्मी गीतों की आर्केस्ट्रा के साथ प्रस्तुति।
फूलों के रंग से दिल की कलम से हमने लिखी रोज पाती, कारवां गुज़र गया गुबार देखते रहे, शोखियों में घोला जाए फूलों का शबाब,ऐ भाई ज़रा देख के चलो,जीवन की बगिया महकेगी,फलसफा प्यार का तुम क्या जानो,काल का पहिया घूमे रे
भैया जैसे सुपरहिट गीतों से सजी यह शाम अपने प्रिय गीतकार को याद करते हुए बहुत सुहानी हो गई।इस सदी के महानायक को हजारों चाहने वालों ने अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
यह पूरा आयोजन फेसबुक पर लाइव हुआ।जिसका हजारों श्रोताओं ने आनन्द लिया।
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