कुछ अफसाने -शोभा किरण

कुछ अफसाने , कुछ मौजूदा हालात लिखेंगे।
कवि हैं, बिना बारिस के भी बरसात लिखेंगे।

कुछ हुआ तो लिख लेंगे, न हुआ तो भी लिखेंगे।
कभी बिना बात के भी ,सौ -सौ बात लिखेंगे।

मिट्टी को लिख दें सोना , हीरे को कांच लिख दे।
दिन को भी जो चाहे ,तो तारों भरी रात लिखेंगे।

बिना रोये आंसू लिखा , रोकर भी खुशी लिखी।
हमदम के बिना भी जिक्रे-मुलाक़ात लिखेंगे।

कभी उदासी लिख डाला, तन्हाई लिख डाली।
जो बने ही नहीं , वो भी ताल्लुकात लिखेंगे।

कलियों का मुस्कुराना,भंवरों को गुनगुनाना लिखा।
हम जो चाहे , तो जूही को भी पारिजात लिखेंगे।

सपनों को हकीकत लिखा,सच को अफसाना लिखा।
उठा के कलम सारे हल को , सवालात लिखेंगे।

मिलन की लिखी बातें , जुदाई की रातें लिखी हैं।
जो कुछ भी हासिल , उनकी ही सौगात लिखेंगे।

जर्रे -जर्रे को रब लिख दूँ , जो चाहे तब लिख दूँ।
एक तिनके को भी , हम पूरी कायनात लिखेंगे।

कोई हार के जीते, #किरण जीत कर भी हारी है।
सब मोहरे हैं यहां पर , ज़िन्दगी को एक बिसात लिखेंगे।

शोभा किरण
जमशेदपुर/झारखंड

mediapanchayat

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