17 लाख प्रति एकड़ की दर से भूमि नहीं देंगे किसान, भले ही चले जाए उनकी जान

foto- सोनौली में प्रदर्शन करते किसान।

सोनौली (गुड्डू गुप्ता की रिपोर्ट) :

सोनौली बार्डर पर इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट निर्माण के भूमि अधिग्रहण में मिल रही मुआवजे की रकम से नाखुश किसान शनिवार को एक जुट होकर सड़क पर उतर आए। प्रशासन पर जबरिया भूमि को अधिग्रहित करने का आरोप लगाते हुए सरकार के खिलाफ नारे बाजी की। किसान बैजू यादव, प्रेम सिंह, छेदी यादव, इंतजार हुसैन, रामआसरे प्रजापति, रामप्रीत विश्वकर्मा, रफीक अहमद, मुनव्वर अली, शमशाद अली, रामायण यादव, ठागे यादव, जोखन प्रसाद व रमेश विश्वकर्मा आदि ने कहा कि प्रशासन उनके भूमि का मुआवजा 17 लाख रुपया प्रति एकड़ दे रही है। जो कि काफी कम है। वह अपनी जान दे देंगे लेकिन उक्त मूल्य पर भूमि नहीं देंगे। किसानों का कहना है कि जिस स्थान पर इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट के लिए करीब 120 एकड़ भूमि मिल रही है। वहां का बाजार मूल्य 1.5 से 2 करोड प्रति एकड़ है। वर्ष 2004 से भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू हुई है। वर्ष 2010 में कुछ किसानों को 80 लाख रुपया प्रति एकड़ की दर से भूमि अधिग्रहित की गई। वर्ष 2016 में 1 करोड़ 32 लाख प्रति एकड़ की दर से सहमति पत्र बना। लेकिन अब करीब 17 लाख प्रति एकड़ की दर से मुआवजा देने की बात कही जा रही है। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि कोई भी प्रशासनिक अधिकारी किसानों से स्पष्ट वार्ता नहीं करता और अपने ही द्वारा पूर्व में घोषित अधिग्रहण मूल्य को गलती बता बदल दिया जाता है।
बतादें की केंद्र सरकार ने बॉर्डर पर लैंड पोर्ट जिसमें की इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट भी है। इसके निर्माण के लिए करीब 350 करोड़ रुपये का धन राज्य सरकार की एनओसी मिलते ही जारी कर देगी। लेकिन 100 किसान अपनी भूमि देने के लिए तैयार नहीं हैं। वह भूमि के उचित मूल्य की मांग कर रहे हैं।

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