शेख फरेंदा गांव के भूमाफियाओं से अकेला जूझ रहा 18 वर्षीय युवक

फोटो- अपने कागजातों को दिखाता भोनू कुमार।

मीडिया पंचायत न्यूज़/ ( धर्मेंद्र चौधरी की रिपोर्ट) :

सोनौली कोतवाली क्षेत्र के शेखफ़रेदा निवासी 18 वर्ष के भोनू कुमार की कहानी में बहुत कुछ है। जो कि भारतीय तंत्र की न्यायिक प्रक्रिया की खामियों, एक नव युवक के जुझारूपन जज़्बात और ग्रामीण भूमाफियाओं के खेल को समाहित किए हुए है।
कहानी ये है-
वर्षों पहले हुबलाल नामक व्यक्ति को नौतनवा तहसील के शेख फरेेदां गांव मेंं 30 डिसमिल भूमि का जोतने-बोन का पट्टा मिला। वह अपनी पत्नी के साथ उस भूमि पर खेती बाड़ी करता था। हुबलाल की मौत के बाद उसकी पत्नी व पांच बेटों के नाम से भूमि हुई। बच्चे बड़े हुए हालत गरीबी की थी।
तो सभी बाहर कमाने चले गए। मां को खेती बाड़ी की निगरानी में लगा दिया।
अकेली महिला को देख उसकी भूमि पर गांव के कुछ भू माफियाओं की नजर पड़ी। फिर उसे हथियाने का खेल शुरू हुआ। भूमि हथियाने का हथियार दबंगई था। मामला पुलिस व राजस्व के पास जाता तो कागज़ महिला का ही पुख्ता मिलता। जिस आधार पर फिर उस महिला को कब्जा मिल जाता था। इस विवाद की जानकारी महिला के लड़के को भी थी। वह समय-समय पर बाहर से आकर अपने मां की मदद और भाग दौड़ करते थे। फिर उस महिला की भी मौत हो गई। भू-माफिया फिर सक्रिय हो गए। शुरू हुआ भूमि कब्जा करने का खेल। मृत महिला के 18 वर्षीय पुत्र ने अकेले ही भू माफियाओं से लड़ने की ठानी। तहसील, पुलिस, डीएम, कार्यालय तक भाग दौड़ की। उसके सभी कागज दुरस्त थे। प्रशासन मौके पर पहुंचा। भूमि की पैमाइश हुई। बीते जून माह के पहले हफ्ते में भोनू को फिर कब्जा मिला।
भोनू ने राहत की सांस ली। और अपने खेत में धान की रोपाई करवा दी।
किंतु फिर रात में उसके धान की फसल लगे खेत को दबंगों द्वारा जोत दिया गया।
भोनू फिर पुलिस व तहसील प्रशासन के पास भाग दौड़ करने लगा। पुलिस ने भोनू की तहरीर पर आरोपितों के खिलाफ एक एनसीआर दर्ज किया।
,,,फिर भोनू परेशान है। वर्षों की लड़ाई फिर पुनरावृत्ति पर आ गई। फिर भी वह लड़ रहा है, जूझ रहा है। थाने पर , चौकी में, तहसील में ,,चक्कर लगा रहा है। मात्र 1 माह की उसने अकेले की लड़ाई में हजारों रुपए गंवा दिए हैं। रकम कहाँ-कहाँ मांगी जाती है और खर्च होती है वह 18 की उम्र में ही काफी कुछ जान गया है। जमीन उसकी , परेशानी उसकी, पैसा खर्च उसी का? इस भारतीय तंत्र से वह रुबरू हो गया। इधर
एक नया इंट्रोडक्शन यह भी मिल गया कि उसके खिलाफ तहरीर है। पुलिस उसको बुलाई है। फिर भी भोनू लड़ रहा है,जूझ रहा है।

नोट- उक्त कहानी भोनू के बयान व उसके पास मौजूद कागजातों के आधार पर है।

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