प्रधानमंत्री आवास की रेवड़ी कुछ अधिक मीठी तो नहीं हो गई?

मीडिया पंचायत न्यूज़ नेटवर्क ( धर्मेंद्र चौधरी की रिपोर्ट):

नगर पालिका परिषद नौतनवा यूं ही आदर्श नहीं बनी है। यहां सरकारी योजनाओं को ज़मीन पर आदर्शता के साथ उतारा जाता होगा। इधर स्वच्छ भारत अभियान के तहत पूरे नगर को शौचालय आच्छादित करने के दावे किए। प्रधानमंत्री आवास योजना भी आ गई। कस्बे के 25 वार्डों में गरीब-गुरबों और एक अदद पक्के मकान के लिए तरस रहे परिवारों का चिन्हीकरण शुरू हुआ। वर्ष 2019 की के अंतिम तक हजारों आवेदन गए। वर्ष 2020 में भी आवास के लिए आवेदनों की लाइन लगी है। डूडा के सर्वेयर्स ने वार्ड सभासदों व नगर पालिका परिषद प्रशासन के सहयोग से कई आवास के पात्रों को ढूंढ निकाला। 882 लोग जो बेचारे बेघर से कटरैन, फूस की झोपड़ी व आधे-अधूरे ढह रहे मकानों में जैसे तैसे रह रहे थे। उन्हें आवास को सुदृढ बनाने के लिए प्रथम किश्त 50 हजार रूपये मिल गई।
लेकिन, तमाम शिकायतें भी मुख्यमंत्री से लगाए अन्य अधिकारियों के पास जा रही हैं। वह यह कि नौतनवा में शौचालय व आवास को रेवड़ी की तरह बांटा गया है। अपात्र भी पात्र बन योजनाओं को लाभ ले रहे हैं। सबसे अधिक धांधली प्रधानमंत्री आवास आवंटन में हुई है। आरोप ये भी लग रहे हैं कि वकील, सरकारी नौकरी पेशा व संपन्न महलनुमा घरों वालों को भी आवास की किश्त मिल रही है। सवाल यह उठ रहा है कि आवास की यह रेवड़ी कहीं अधिक मीठी तो नहीं हो गई?
अगर उक्त आंकड़ों पर मनन किया जाए तो नगर के कुल 25 वार्डों में 882 आवास की संस्तुति हुई है। इस प्रकार प्रति वार्ड कुल करीब 35 आवास की संस्तुति हुई है। औसतन मामला ठीक-ठाक लग रहा है। लेकिन वार्ड वार कुछ आंकड़े चौकानें वाले है। कस्बा के वार्ड नंबर 4 विष्णुपुरी में कुल 150 आवास संस्तुत हुए है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या आदर्श नगर पालिका का दर्जा प्राप्त नगरपालिका के सिर्फ एक ही वार्ड में अब तक 150 लोग पक्का मकान विहीन थे? और अगर ऐसा था तो किस आधार पर नौतनवा को आदर्श नगर पालिका का दर्जा मिला?
शिकायतों की माने तो वार्ड सभासद के परिवार के सदस्य भी अब तक पक्के मकान से महरूम थे। जिन्हें आवास का सुख मिल ही गया। सरकारी स्कूल के अध्य्यापक व अधिवक्ता के परिवार भी आवास की किश्त पा रहे हैं। शानदार मीठी रेवड़ी है, लेकिन कुछ अधिक मीठी तो नहीं हो गई?
अब जांच रूपी चींटियां ही बता पाएंगी कि किस वार्ड में आवास की मिठास कितनी जायज है व कितनी अधिक? और यह भी कि इस मिठास का स्वाद किसने-किसने चखा?
मीडिया पंचायत की पड़ताल शुरू होगी वार्ड-वर। तब तक क्रमशः,,,

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